20 जून से अस्पताल में भर्ती बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान ने आज आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया. उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई. बॉलीवुड में इससे पहले भी कई कलाकार दिल का दौरा पड़ने से अपनी जान गंवा चुके हैं.

ओम पुरी, रीमा लागू, इंदर कुमार और फारुक शेख जैसे कलाकार और जयललिता जैसे लोगों की लंबी फेहरिस्त है जिनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई. गौरतलब है कि दिल का दौरा पड़ना दुनिया की सबसे घातक बीमारी है. लेकिन कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर होता है जिन्हें लोग आम तौर पर नहीं जानते. अगर आप भी दोनों बीमारियों के लक्षण और कारण को नहीं पहचाते तो जान लीजिए.

जानिए कब उठता है कार्डियक अरेस्ट?

कार्डियक अरेस्ट इंसान को उस वक्त उठता है जब उसके दिल के भीतरी हिस्सों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान गड़बड़ा जाए. उसकी वजह से दिल के धड़कने की प्रवाह अचानक असंतुलित हो जाती है. वक्त रहते अगर इसका इलाज नहीं किया जाए तो ये बीमारी घातक बन जाती है. बीमारी के होने पर मौत तेजी से होने की आशंका ज्यादा रहती है. इसके प्रमुख लक्षणों में थकान, दिल का धकधकना, दिल में दर्द का एहसास, चक्कर आना और सांसों का छोटा होना सामने आता है.

हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट में है अंतर

सांस लेना या दिल का धड़कना बंद हो जाने पर कार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन (CPR) के जरिए हार्ट रेट को बहाल किया जाता है. ये एक जिंदगी बचाने की आपातकालीन प्रक्रिया होती है. जबकि कार्डियक अरेस्ट को लोग अक्सर गलती से हार्ट अटैक के तौर पर इस्तेमाल करने लगते हैं. जिस शख्स को हार्ट अटैक आता है उस वक्त हृदय के कुछ हिस्सों में खून का बहाव जम जाता है. हार्ट अटैक कई दफा कार्डियक अरेस्ट का कारण बनता है. हार्ट अटैक में लक्षण तुरंत भी दिख सकते हैं और कुछ देर बाद भी सामने आ सकते हैं. यही नहीं कुछ दिनों बाद इसका प्रभाव उजागर हो सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, हार्ट अटैक घातक हो सकता है लेकिन इससे तुरंत डेथ नहीं होती.

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