कई बार अस्पताल प्रशासन या फिर डॉक्टर्स मरीज के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते या फिर इलाज के लिए मना करते हैं तो आप उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवा सकते हैं.

नई दिल्ली: इस कोरोना संकट काल में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं कि किसी अस्पताल ने मरीज का इलाज करने से मना कर दिया और उसके बाद उस मरीज की मौत हो गई. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोई भी अस्पताल आपका इलाज करने से मना नहीं कर सकता है. ऐसा करने पर आप अस्पताल के खिलाफ केस कर सकते हैं. हम में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें अपने स्वास्थ्य अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं है.

मरीजों के हैं 17 स्वास्थ्य अधिकार

1. स्वास्थ्य संबंधी हर सूचना आप डॉक्टर या अस्पताल से ले सकते हैं.

2. अपने स्वास्थ्य व इलाज संबंधी रिकॉर्ड्स और रिपोर्ट्स पा सकते हैं.

3. इमरजेंसी हालत में पूरा या एडवांस भुगतान किए बगैर आपको इलाज से मना नहीं किया जा सकता.

4. आपकी सेहत के बारे में अस्पताल/डॉक्टर को गोपनीयता/निजता रखना होगी व अच्छा बर्ताव करना होगा.

5. मरीज के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता.

6. मानकों के हिसाब से इलाज में क्वालिटी और सुरक्षा आपको मिलना चाहिए.

7. आप इलाज के अन्य उपलब्ध विकल्प चुन सकते हैं.

8. आप सेकंड ओपिनियन लेने के लिए आजाद हैं.

9. इलाज की दरों और सुविधाओं को लेकर पारदर्शिता अस्पतालों/डॉक्टरों को बरतनी चाहिए.

10. आप दवाएं या टेस्ट के लिए अपने हिसाब से स्टोर या संस्था का चयन कर सकते हैं.

11. गंभीर रोगों के इलाज से पहले आपको उसके खतरों, प्रक्रियाओं व अंजाम बताकर मरीज की मंजूरी आवश्यक है.

12. व्यावसायिक हितों से परे ठीक से रेफर या ट्रांसफर किए जाना चाहिए.

13. बायोमेडिकल या स्वास्थ्य शोधों में शामिल लोगों से सुरक्षा आपको मिलना चाहिए.

14. क्लीनिकल ट्रायल में शामिल मरीजों से आपको सुरक्षित रखा जाना चाहिए.

15. बिलिंग आदि प्रक्रियाओं की वजह से आपका डिस्चार्ज या शव सौंपने को अस्पताल टाल नहीं सकता.

16. मरीज को आसान भाषा में स्वास्थ्य व इलाज के बारे में बताना चाहिए.

17. आपकी शिकायतें सुनकर अस्पताल या फिर डॉक्टर को उसका हल निकालना चाहिए.

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