• Post published:July 10, 2020
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Gold Smuggling

 

  • तिरुवनंतपुरम हवाईअड्डे पर कस्टम विभाग के अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर यूएई से आए एक डिप्लोमेटिक सामान को पकड़ा था
  • वाणिज्य दूतावास का कर्मचारी बताकर 30 किलो सोने को लेने आए व्यक्ति को कस्टम विभाग ने हिरासत में ले लिया, वो ऐसा एक साल से कर रहा था

तिरुवनंतपुरम. केरल की राजनीति में इन दिनों एक घोटाले को लेकर उथल-पुथल मची हुई है। मामला राज्य में बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी का है। घोटाले के तार राज्य के बड़े नेताओं और सरकारी अफसरों तक पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के प्रिंसिपल सेक्रेटरी आईएस अधिकारी एम.शिवशंकर का घोटाले में नाम आने के बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री को उन्हें पद से हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि गृह मंत्रालय ने एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी मामले में जांच करने के लिए एनआईए को अनुमति दे दी है। इस तरह की सुनियोजित तस्करी देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा साबित हो सकती है। (gold smuggling)

  • क्या है घोटाला

सोने की कीमत 15 करोड़ रुपए बताई जा रही है

रविवार पांच जुलाई को तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग के अधिकारियों ने पहले से मिली गुप्त सूचना के आधार पर यूएई से आया एक डिप्लोमेटिक सामान पकड़ा। विदेश मंत्रालय से अनुमति लेने के बाद यूएई वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों की मौजूदगी में जब उसे खोला गया तो उसमें घरेलू इस्तेमाल की कई चीजों में भरा हुआ 30 किलो सोना मिला। इसकी कीमत लगभग 15 करोड़ रुपए बताई जा रही है। (gold smuggling)

अपने आप को वाणिज्य दूतावास का कर्मचारी बताकर सोने को लेने आए व्यक्ति सरित कुमार को कस्टम विभाग ने पूछताछ के बाद हिरासत में ले लिया है। पूछताछ में सरित ने बताया कि वो लगभग एक साल पहले तक वाणिज्य दूतावास में बतौर जनसंपर्क अधिकारी काम करता था, लेकिन अब वह दूतावास का कर्मचारी नहीं है। वह दुबई में भी काम कर चुका है। (gold smuggling)

सरित लगभग एक साल से हवाईअड्डे से इस तरह का सामान ले जा रहा था। सरित ने बाद में विभाग को बताया कि उसकी एक सहयोगी केरल सरकार के आईटी विभाग की एक कर्मचारी है, जिसका नाम स्वप्ना सुरेश है। सुरेश से पूछताछ करने के लिए जब विभाग हरकत में आया तो पता चला कि वो सामान खोले जाने के एक दिन पहले से लापता है।

कौन है स्वप्ना सुरेश

पहले यूएई के वाणिज्य दूतावास में एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी के पद पर काम करती थी

स्वप्ना का पूरा रिकॉर्ड सामने आने के बाद पता चला कि वो भी पहले यूएई के वाणिज्य दूतावास में एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी के पद पर काम करती थी, वो भी पहले दुबई में रहती थी। 2013 में उसे तिरुवनंतपुरम में हवाईअड्डे पर एक कंपनी में नौकरी मिली, वहां उसने एक वरिष्ठ कर्मचारी के साथ मिलकर हवाईअड्डे के एक कर्मचारी के खिलाफ यौन शोषण की कम से कम 17 फर्जी शिकायतें दर्ज कराईं। (gold smuggling)

उस कर्मचारी ने इस बारे में पुलिस से शिकायत की और पूरी साजिश की जांच की मांग की। मामले में सुरेश को बतौर आरोपी नामित किया गया, लेकिन बाद में जांच नतीजे तक नहीं पहुंची। इस नौकरी के बाद स्वप्ना सुरेश को यूएई के वाणिज्य दूतावास में नौकरी मिल गई, जहां उसका कई बड़ी हस्तियों के साथ उठना बैठना रहा। (gold smuggling)

2019 में किन्हीं कारणों की वजह से उसे इस नौकरी से निकाल दिया गया। नौकरी से निकाले जाने और एक पुलिस केस में नामित होने के बावजूद, उसे किसी तरह से केरल सरकार के आईटी विभाग के एक उपक्रम में नौकरी मिल गई। यह विभाग खुद मुख्यमंत्री विजयन संभालते हैं और स्वप्ना की नियुक्ति के समय उनके प्रधान सचिव एम. शिवशंकर इस उपक्रम के अध्यक्ष थे। (gold smuggling)

  • क्या कहना है विपक्ष का

प्रधान सचिव ने प्राइसवाटर हाउसकूपर्स के जरिए स्वप्ना के नाम की नियुक्ति की सिफारिश की थी

मीडिया में आई खबरों में दावा किया गया है कि प्रिंसिपल सेक्रेटरी शिवशंकर ने बहुराष्ट्रीय कंपनी प्राइसवाटर हाउसकूपर्स के जरिए स्वप्ना के नाम की उस पद पर नियुक्ति के लिए सिफारिश की थी। उसकी घोषित शैक्षणिक योग्यता के भी फर्जी होने का दावा किया जा रहा है। विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह सुनियोजित साजिश थी और शिवशंकर स्वप्ना से मिले हुए हैं। विपक्ष के नेताओं ने मुख्यमंत्री विजयन के इस्तीफे के भी मांग की है। (gold smuggling)

कांग्रेस नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। केरल बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया है कि इस साजिश में मुख्यमंत्री भी शामिल हैं, क्योंकि वो खुद स्वप्ना को पहले से जानते रहे हैं और मामले का पर्दाफाश होने के बाद स्वप्ना को बचाने की पहले कोशिश भी उनके दफ्तर से ही हुई। (gold smuggling)

मुख्यमंत्री विजयन ने इन आरोपों का खंडन किया है, लेकिन इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले में केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच की मांग की है और कहा है कि राज्य सरकार जांच में पूरा सहयोग देगी। बताया जा रहा है कि सीबीआई की एक टीम ने मामले में प्रारंभिक जांच शुरू भी कर दी है।

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