• Post published:May 15, 2020
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स्टडी में दावा किया गया है कि देश में 34 फीसदी परिवार ऐसे हैं जहां कोई अतिरिक्त मदद नहीं पहुंची तो वो एक हफ्ते से ज्यादा गुजारा नहीं कर पाएंगे.

नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन का तीसरा चरण खत्म होने वाला है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संकेत दे चुके हैं कि 17 मई के बाद भी लॉकडाउन जारी रहेगा. ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था पर भी लॉकडाउन का असर दिखने लगा है. एक स्टडी में दावा किया गया है कि लॉकडाउन के दौरान भारत के 84 फीसदी परिवारों की आय इस दौरान घटी है.

अमेरिका की शिकागो बूथ यूनिवर्सिटी के Rustandy Center for Social Innovation ने सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के उस डेटा का विश्लेषण किया है जिसमें देश के 27 राज्यों के 5,800 परिवारों का सर्वे किया गया है.

इस विश्लेषण के आधार पर दावा किया गया है कि आर्थिक हालात खराब होने के पीछे कोरोनावायरस का प्रसार बड़ा कारण नहीं है, बल्कि लॉकडाउन से पहले प्रति व्यक्ति आय, लॉकडाउन की गंभीरता और जरूरी मदद कितने प्रभावी तरीके से पहुंची, ये मुख्य कारण हो सकते हैं. इतना ही नहीं इस स्टडी के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर पड़ा है.

34 फीसदी परिवार मुश्किल में

इस स्टडी के अनुसार त्रिपुरा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और हरियाणा सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. साथ ही देश के दो सबसे बड़े धार्मिक समूह, हिंदू और मुसलमानों पर समान रूप से लॉकडाउन की चोट पड़ी है. स्टडी में साथ ही दावा किया गया है कि देश के 34 फीसदी परिवार ऐसे हैं, जो बिना किसी मदद के एक हफ्ते से ज्यादा गुजारा नहीं कर पाएंगे.

देश में आर्थिक हालात को देखते हुए मोदी सरकार ने इसी हफ्ते बड़े राहत पैकेज का ऐलान किया था. इसमें MSME सेक्टर को सबसे ज्यादा मदद देने का प्रावधान किया गया था, जबकि सैलरी क्लास के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अवधि को बढ़ाया गया था.

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