हिन्दू घर वापसी

‘🔥 शुद्धि” (हिन्दू घर वापसी )
महर्षि दयानन्द की आर्य (हिन्दू ) समाज को अनुपम देन🔥

➡ जो हिन्दू किसी कारण से मुस्लिम या ईसाई बन गए थे उनके लिए महर्षि स्वामी दयानन्दजी महाराज ने वापिस सनातन धर्म के दरवाजे खोल दिए ।  हिन्दू घर वापसी

➡ इस विवरण को ध्यान से पढ़ें और महर्षि की देन को समझें-

✍ श्री एम0 मुजीब ने अपनी पुस्तक ‘दी इडियन मुस्लिम‘ में कई उदाहरण देते हुये किया है और विस्तार से बताया है कि धर्म बदलने के बाबजूद मुसलमानों ने अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों में हिंदू तहजीब को अपनाये रखा। हिन्दू घर वापसी

➡ उन्होंनें लिखा है-
“करनाल में 1865 तक बहुत से मुस्लिम किसान अपने पुराने गांवों के देवताओं की पूजा करते थे और साथ ही मुसलमान होने के कारण कलमा भी पढ़ते थे। इसी तरह अलवर और भरतपुर के मेव और मीना मुसलमान तो हो गये थे पर उनके नाम पूर्णरुपेण हिंदू होते थे और अपने नाम के साथ वो खान लगाते थे ।”
“ये लोग दीपावली, दुर्गापूजा, जन्माष्टमी तो मनाते ही थे साथ ही कुएं की खुदाई के वक्त एक चबूतरे पर हनुमान की पूजा करते थे। मेव भी हिंदुओं की तरह अपने गोत्र में शादी नहीं करते। मीना जाति वाले मुस्लिम भैरो (शिव) तथा हनुमान की पूजा करते थे और (क्षत्रिय हिंदुओं की तरह) कटार से शपथ लेते थे।”

✍ बूंदी राज्य में रहने वाले परिहार (शायद वास्तविक शब्द परमार है) मीना गाय गोश्त से परहेज करते थे। रतलाम से लगभग 50 मील दूर जाओरा क्षेत्र में कृषक मुसलमान शादी के समय हिंदू रीति-रिवाज को मानतें है ।

➡ स्वामी श्रद्धानन्द अपनी पुस्तक हिन्दू संगठन में लिखते हैं–

✍ राजपूताना ( आज का राजस्थान) से कुछ युवक मेरे पास आए और मुझे सन्यासी समझ कर प्रणाम किया. मैंने उन्हें हिन्दू समझा. उन्होंने अपने सिर पर टोपी उतार कर चोटी भी दिखाई .मैंने उन्हें शुद्धि की आवश्यकता के बारे में बताया. तभी कोई आया और उसने मुझे बताया कि ये युवक मुस्लिम हैं. उसके बाद मैंने सोचा इनकी कैसी शुद्धि? इन्होने तो अत्यन्त कठिन परिस्थिति में भी अपना धर्म नहीं छोड़ा. प्रायश्चित तो हिन्दू समाज को करना चाहिए जिन्होंने अपने भाइयों को अलग कर दिया ।

✍ दक्षिण भारत – भयंकर हिन्दू मुस्लिम दंगा हुआ. अनेकों हिन्दूओं को जबरदस्ती मुस्लिम बनाया गया. दंगा शांत होने के बाद उत्तर भारत से लोग गए ।

➡ उनमे 2 मुख्य थे

  1. करपात्री जी महाराज
  2. प्रिंसिपल लक्ष्मी जी ( स्वामी विद्यानन्द जी)

➡ करपात्री जी ने कहा – जिसे मुस्लिम बना लिया गया है यदि वह हिन्दू बनना चाहता है तो उसे एक पाव गाय का गोबर खाना पड़ेगा. ( यह जानकारी उस समय की मैगजीन में भी छपी थी)😳😡

प्रिंसिपल लक्ष्मी जी आर्य समाज से थे. उन्होंने कहा- जो अपने को हिन्दू मानता है वह हिन्दू है. उसे कोई प्रायश्चित की जरूरत नहीं है ।😊👍

➡➡ इन 3 उदाहरणों से आपको पता चल गया होगा कि हिन्दू समाज में से केवल बाहर जाने का रास्ता था. अंदर आने के रास्ते पर मतान्ध धर्म गुरुओं ने ऊँची दीवार खड़ी कर रखी थी ।

महर्षि स्वामी दयानन्दजी ने अपने तपोबल से इस दीवार को तोड़ दिया । {समीक्षार्थ}

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