68 देशों में नियमितीकरण काफी हद तक बाधित है और इन देशों में 1 साल से कम आयु के लगभग 80 मिलियन बच्चों के शिशु होने की संभावना है।

नई दिल्ली: दुनिया में लगभग दो अरब बच्चे इस वक्त भारी जोखिम में हैं। कोरोना का जानलेवा वायरस इन के लिए तो है, साथ ही इसके जैसे दूसरे विषाणु भी बच्चों पर कभी भी परिपक्व हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ ने एक साथ चेतावनी दी है। विश्व के इन दो शीर्ष स्वास्थ्य संगठनों के मुताबिक कोरोना की वजह से बच्चों का टीकाकरण कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुआ है जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

आपको बता दें कि छोटे बच्चों को हेपेटाइटिस, टाइफाइड, हैजा, जापानी इंसेफेलाइटिस, रेबीज, पोलियो, खसरा, गलसुआ और रूबेला, चिकनपॉक्स, निमोनिया और इन्फ्लूएंजा जैसी महामारी से बचाने के लिए टीका दिया जाता है। लेकिन लॉकडाउन की वजह से इन बीमारियों का टीका बच्चों तक नहीं पहुंच रहा है।

WHO के मुताबिक इस समय कम से कम 68 देशों में नियमितीकरण काफी हद तक बाधित है और इन देशों में 1 साल से कम उम्र के लगभग 80 मिलियन बच्चों के प्रभावित होने की संभावना है।

WHO की मानें तो कोरोना की वजह से …

खसरा और पोलियो के खिलाफ टीकाकरण बुरी तरह से प्रभावित है
खसराकरण अभियान 27 देशों में निलंबित कर दिया गया है
जबकि 38 देशों में पोलियो के टीकाकरण को पकड़ पर रखा गया है।

बता दें कि कोरोनावायरस का प्रकोप जानना में लगातार फैलता जा रहा है। दुनिया के 213 देशों में पिछले 24 घंटे में 107,706 नए कोरोना के मामले सामने आए और मरने वाले लोगों की संख्या में 5,245 का इजाफा हो गया। वर्ल्डोमीटर के मुताबिक, दुनिया में अब तक लगभग 53 लाख लोग कोरोनावायरस से आशंकित हो चुके हैं। इनमें से 3 लाख 39 हजार 418 लोगों की मौत भी हो चुकी है। वहीं 21 लाख 56 हजार 288 लोग ट्रांसफर फ्री भी हुए हैं। दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत कोरोना के मामले में केवल 12 देशों से आए हैं। इन देशों में कोरोना पीड़ितों की संख्या 40 लाख है।

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जोखिम में बच्चों के नियमित प्रतिरक्षण, जोखिम में कम से कम 80 मिलियन बच्चे

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